गुडिय़ा
पापा मुझको देते प्यार,
मम्मी ममता देती।
मैं पापा की प्यारी गुडिय़ा,
जो चाहूं सो करती।।
दादा मुझे खिलाते बिस्कुट
खूब पेट भर खाती।
दादीजी की पकड़ के अंगुली
मेला देखने जाती।।
अगर कभी मैं जाऊं रूठ
मुझको सभी मनाते।
नाना-नानी बैठ शाम को
लोरी मुझे सुनाते।।
शिवमोहन यादव,कानपुर, देहात
097956 24197



